Tuesday, 18 August 2015

मुफलिसी को आने दो

शिकायतें तो बहुत हैं मगर जाने दो
जो गुज़र गया उसे गुज़र जाने दो
वो होंगे तो कुछ काम होगा मेरा
साहब को इसी वहम में मर जाने दो
नादान परिदों को पर फड़फड़ाने दो
जब गिरें आसमां से तो गिर जाने दो
खंजर छिपा के बज़्म में दोस्त लाएंगे
ये ठहरे दुश्मन इन्हें अंदर आने दो

ज़बरदस्ती से नहीं बनते दिल के रिश्ते
वो दामन छुड़ा के जाते हैं तो जाने दो
जिंदगी क्या है ये जल्द समझ जाओगे
घर में बस  मुफलिसी को आने दो
सुबह होने दो अक्ल ठिकाने पर होगी
अभी तो पी रखी है उतर जाने दो

मेहरीन जाफरी

Friday, 14 August 2015

कल कैसे कह पाऐंगे मेरा भारत महान!

दूध में डिटर्जेंट, चीनी में आटा,
जेब खाली पर हम बूट पहने बाटा
मैगी में लेड, सरकारी जाॅब रिश्वत से सेट
चारा, कोल और व्यापम घोटाला
बेटे ने सम्पत्ति की खातिर मां को मार डाला
आईपीएल में फिक्सिंग, दारू तक में मिक्सिंग
थाने में रेप, परीक्षा में चेपमचेप
आपे से बाहर संसद में नेता
ग़रीब जनता की कोई न ख़बर लेता
राधे मां का रायता, आसाराम की लीला
जवानी पर इतराएं मुन्नी-शीला
फेसबुक, वाॅट्स-एप, ट्विटर पर सब टशन में
भूखे का पेट पर, कोई न भरे वतन में
तहज़ीब-संस्कार की बातें हुई बेमानी
पूछें, शेयर बाज़ार में कितना चढ़ा सोना, कितनी गिरी चांदी
कहीं फटा बम तो कहीं पटरी से उतरी रेल
हमें यह चिंता ‘बिग बज़ार‘ में काहे की लगी सेल
पांच वक्त पढ़ेंगे नमाज़, मंदिर की घंटी रोज़ बजाएंगे
ग़रीब का हक, फिर भी हज़म कर जाएंगे
सार्वजनिक मंच पर हिंदी-हिंदी चिल्लाएंगे
पर सोर्स लगाकर बच्चे को इंग्लिश मीडियम से पढ़ाएंगे
पड़ोसी के जितना ऊंचा बंगला हम भी बनाएंगे,
क्या फर्क पड़ता है, चरित्र कितना नीचे गिराएंगे
बड़ी-बड़ी बातें नहीं, करें बड़े-बड़े काम
तब दें, गंाधी को श्रद्धांजलि, कलाम को करें सलाम
जो न छोड़ा हमन,े यह दोहरा चरित्र और झूठी शान
तो कल कैसे कह पाएंगे? मेरा भारत महान!
मेहरीन जाफरी

Wednesday, 5 August 2015

मैं ग़मगीन हंू इसलिए नहीं...................!

क्यंू करते हो ऐसा? खुदा ने इतनी खूबसूरत दुनियां बनाई। इस दुनियां में सबसे हसीन और अक्लमंद इंसान की ज़ात ही तो है जो सही और ग़लत के बीच के फर्क को समझने-बूझने की ताक़त रखती है। फिर क्यंू जिंदगी जीने के लिए गलत रास्ता ही चुनते हो। बेलगाम ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए ही न! और तुम ही नहीं रहे तो फिर! क्या होगा इन ख्वाहिशों की ताबीर का? शायद तुम्हारे जुनून से ख्वाब और ख्वाहिशें पूरी हो भी गई हों लेकिन यह तो सोचो कि तुम तो रहे नहीं साथ ही एक दाग़ छोड़ गए अपने पूरे खानदान के माथे पर, एक आतंकी होने का। इस दुनियां में तो हिसाब हो गया तुम्हारे आमाल का अब खुदा की बारगाह में भी तुम पर केस चलेगा। वहां भी तो अभी लगेगा तुम पर इल्जा़म हज़ारों बेगुनाह लोगों की जिंदगी बेवक्त छीन लेने का। बच्चों को अनाथ बनाने का। औरतों को बेवा और मांओं की गोद उजाड़ने का। देखो तुम कितने लोगों के गुनहगार हो! फिर भी न जाने क्यों अफसोस है इस बात का कि तुम भी एक बेवक्त की मौत मारे गए और पीछे छोड़ गए अपने रोता-बिलखता उन लोगों को जिनका शायद तुम्हारे गुनाह से कोई लेेेेेेेेना-देना ही नहीं।
लेकिन पीछे तो उनके भी बहुत से लोग थे रोने के लिए, जिनके जिस्म चिथड़े हुए थे। बहुत बड़ा फर्क है तुममे और उन बेगुनाह लोगों में जो तुम्हारे कारण मुम्बई बम धमाकों में मारे गए। फिर भी मैं कुछ ग़मगीन सी हंू तुम्हारी मौत पर इसलिए नहीं कि तुमसे हमदर्दी है बल्कि इसलिए कि मैं अल्लाह की दी हुई जिंदगी को बहुत.....बहुत.....बहुत बेशक़ीमती मानती हंू। उसी का दिया हुआ दिल है मेरे सीने के अंदर........जो हस्सास है। रो पड़ता है किसी की भी तकलीफ पर.........फिर वह तुम जैसा गुनहगार ही क्यों न हो। फिर भी मैं रोती हंू इसका मतलब यह मत लगाना कि कमजो़र हंू............मैं अपने आंसू पोछते हुए यह कहना चाहती हंू कि हां मैं अपने देश के कानून पर भरोसा रखती हंू और एक नहीं हज़ार बार उन लोगों को फांसी दिए जाने के हक़ में हंू जो इंसान कहलाते तो हैं लेकिन खुद अपने हाथों इंसानियत का गला घोंटने से बाज़ नहीं आते। जिस्म तो इंसान का लेकिन सोंच और आमाल से हैवान। ऐसे लोगों के लिए कड़े फैसले ज़रूरी होते ही हैं। कहते हैं न कि कुछ गुनाह तो खुदा भी माफ नहीं कर सकता। सच है। याक़ूब मेमन और उस जैसों के लिए कोई माफी व रियायत होनी भी नहीं चाहिए। अभी नहीं, कभी नहीं।