Sunday, 3 August 2014

दिस इज नाट इंटरटेंमेंट आमिर!

 आप ये सोंचकर गर्व से फूलकर कुप्पा हो सकते हैं कि देश के लाखों-करोड़ों नौजवान आपको अपना ‘रोल माडल‘ मानते हैं। इस नाते साल दो साल में करोड़ों के बजट वाली एक ऐसी धांसू फिल्म सिनेमा के पर्दे पर उतारनी जरूरी है, जिससे न सिर्फ आप खुद जबरदस्त मुनाफा कमाएं साथ ही पब्लिक भी देखकर यह कह सके कि ‘चलो पैसा वसूल हुआ‘। बालीवुड के नामचीन सितारों और आज की आम नौजवान पीढ़ी के बीच रिश्ता केवल इतना ही होता तो बात कुछ और थी। पर दिक्कत ये है कि बात यहीं खत्म नहीं होती। ये आपके जैसे बोलना चाहते हैं। चलना चाहते हैं। कपड़े पहनना चाहते हैं। कुल मिलाकर आपके जैसा ही दिखना चाहते हैं। फिर इन भोलेभाले नौजवानों से ये उम्मीद कैसे की जा सकती है कि किसी नए प्रयोग पर ये ‘वाउ! वाट ए न्यू एक्सपेरीमेंट‘ या ‘वाट ए पीस आफ आर्ट‘ कहकर आगे बढ़ जाएंगे! जी बिल्कुल ठीक समझे आप। मैं यहां बालीवुड के सुपर स्टार के साथ-साथ एक सोशल थिंकर की इमेज बनाने वाले ‘आमिर खान‘ से मुखातिब हंू।
मानना पड़ेगा कि अपनी आगामी फिल्म ‘पीके‘ में आमिर ने बड़ा ही चैंकाने वाला दृष्य फिल्माया है जो इन दिनों चर्चा में है। चैंकाने वाला इसलिए नहीं कि इसमें एक नंग-धड़ंग, शर्म की जगह पर बड़ा सा टेपरिकार्डर लगाए बालीवुड का एक नायक खड़ा हैं। बल्कि इसलिए कि इस अवस्था में ‘दि आमिर खान‘ खड़े हैं। शायद फिल्म को प्रोमोट करने और रिकार्ड मुनाफा कमाने के लिए यही हथकंडा सबसे ज्यादा काम आने वाला है। लेकिन मेरा मानना है कि आमिर खान और उन जैसे अन्य सितारों को जो आम नौजवानों के रोल माडल हैं और एक सामाजिक चिंतक के रूप में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए खुद की सोशल इमेज और नैतिकता के साथ समझौता करना शोभा नहीं देता। फिल्म ‘गजनी‘ में जब आमिर खान ने सिर पर लम्बी लकीर खिंचवाईं थी तो मुझे याद है कि मोहल्ले में, रास्ता चलते हुए, बाजार में चार-छह नौजवान वैसे ही स्टाइल में सिर पर लकीर बनवाए हुए दिख जाते थे। उन्हें गजनी की कहानी से कोई लेना-देना नहीं था कि उसमें कैसे आमिर के सिर पर चोट लगने की वजह से वह लकीर पड़ जाती है। उन्होंने तो इसे फैशन ही माना। अब जब आमिर नंगधड़ंग खड़े हैं तो...........!!! मैं ये नहीं कहती कि सभी नंगे हो जाएंगे। शायद इतनी समझ तो है हमारे देश के किशोरों व नौजवानों में, लेकिन इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर उनमें नंगेपन को लेकर शर्म खत्म हो जाए। साथ ही इस तरह के पोस्टर चाहे वे नायिकाओं के हों या नायकों के यौन उत्तेजना जगाने वाली सामग्री में जरूर गिने जा सकते हैं। इससे यौन हिंसा को बढ़ावा मिल सकता है। आज जब देश में चारों तरफ यौन हिंसा की घटनाएं आम होती जा रही हैं। हमें अपनी नौजवान पीढ़ी को सम्भालने की जरूरत है। यह जिम्मेदारी भला समाज में रोल माडल की भूमिका अदा कर रहे लोगों से बेहतर कौन उठा सकता है। हालांकि एक जागरूक व्यक्ति द्वारा आमिर के इस पोस्टर के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की जा चुकी है। मेरा मानना है कि समाज के अन्य स्तंभ से भी इसके खिलाफ स्वर मुखर होने चाहिए। केवल आमिर के पोस्टर ही नहीं बल्कि इस तरह की अन्य दृष्य सामग्रियों पर रोक के लिए सख्त आदेश-निर्देश जारी होने चाहिए। उनके खिलाफ भी जो खुद मुनाफा कमाने के लिए इस तरह के विज्ञापन छापते या प्रसारित-प्रचारित करते हैं या इसकी अनुमति देते हैं। अंत में बस इतना कहना चाहते हैं कि हम किसी की प्रतिभा के खिलाफ नहीं है। ‘कयामत से कयामत तक‘ के रोमांटिक आमिर, ‘दिल‘ के आशिक आमिर, ‘लगान‘ के किसान आमिर, ‘मंगल पाण्डेय‘ के क्रातिकारी आमिर, ‘थ्री ईडिएट‘ के इनोवेटिव-क्रिएटिव आमिर और ‘सत्यमेव-जयते‘ के समाज-सुधारक आमिर बेशक काबिल-ए-तारीफ हैं।

3 comments:

  1. आपकी बात बिलकुल सही है युवाओं का एक वर्ग इन्हें अपने रोल मॉडल के तौर पे देखता और फोल्लो करता है....इस तरह के घटिया पोज़ से इंसानियत ही शर्मसार होनी ना के समाज का भला होना है...

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  2. विचारोत्तेजक लेख। विचार सराहनीय।

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  3. विचारोत्तेजक लेख। विचार सराहनीय।

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